‘फ्रेंडली नेबरहुड सुपरहीरो’ के रूप में दुनियाभर के लोगों के दिलों में घर कर चुका स्पाइडर-मैन जब भी पर्दे पर आता है, उसके चाहने वालों की उत्सुकता चरम पर पहुंच जाती है। इसका अंदाजा इस विश्व विख्यात फ्रैंचाइजी की ब्लॉकबस्टर पिछली कड़ी ‘स्पाइडर-मैन: नो वे होम’ की करीब 2 अरब डॉलर की रिकॉर्ड कमाई से लगाया जा सकता है। ऐसे में, ‘नो वे होम’ में अपनों को खो चुके स्पाइडर-मैन यानी पीटर पार्कर का आगे का सफर कैसा होगा, यह हर कोई जानना चाहता था और ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ उन्हीं सवालों का जवाब है। करीब 5 साल इंतजार के बाद पीटर पार्कर की बड़े पर्दे पर वापसी हुई है। भारत में मार्वल स्टूडियोज और सोनी पिक्चर्स की यह फिल्म बाकी दुनिया से एक दिन पहले 30 जुलाई 2026 को ही रिलीज हो गई है।
‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ की कहानी
क्रिस मैकेना और एरिक सोमर्स की लिखी यह कहानी ‘नो वे होम’ से चार साल आगे की है, जहां डॉक्टर स्ट्रेंज के स्पेल के बाद सारी दुनिया पीटर पार्कर (टॉम हॉलैंड) को भूल चुकी है। यहां तक कि उसकी गर्लफ्रेंड एमजे (जेंडया) और दोस्त नेड (जैकब बैटलन) तक। इसलिए, इस अकेलेपन को भरने के लिए वह खुद को पूरी तरह स्पाइडर-मैन को कर्तव्यों को निभाने में झोंक देता है। न्यूयॉर्क शहर में, स्टार्क के रिसोर्स और एवेंजर्स से जुड़े कनेक्शन छिन जाने के बाद, पीटर बढ़ते मानसिक तनाव, अकेलेपन और शरीर में हो रहे अजीब बदलावों का सामना कर रहा है।
इन निजी परेशानियों के बीच पीटर की मुलाकात फ्रैंक कैसल (जॉन बर्नथल) और ब्रूस बैनर (मार्क रफालो) से होती है। पीटर एक बाथहाउस में सुरक्षा से जुड़ी एक मीटिंग के दौरान येलेना बेलोवा (फ्लोरेंस प्यू) से भी सलाह लेता है। लेकिन इन सब के बीच उसका सामना जीन ग्रे से होता है, जो एक नया और सबसे भयावह खतरा है। कहानी के अंत में, यह भी बताया जाता है कि पीटर पार्कर की ‘एवेंजर्स: डूम्सडे’ में वापसी होगी।
‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ मूवी रिव्यू
फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ दिखाती है कि एक सुपरहीरो होने के ताकत की क्या कीमत अदा करनी पड़ती है। दुनिया को बचाने वाले सुपरहीरो को खुद कैसे अकेलेपन, खालीपन और जिम्मेदारियों के बोझ से जूझना पड़ता है। यही इमोशन स्पाइडर-मैन को एक आम इंसान और ‘फ्रेंडली नेबरहुड हीरो’ बनाता है, जिससे दर्शक अपनापन महसूस करता है।
कहानी एक्शन- इमोशन के बीच बराबर तालमेल बनाकर चलती है। यहां तक कि लोगों के दिमाग में घुसकर तबाही मचाने वाली मुख्य विलेन जीन ग्रे (सैडी सिंक) को भी एक बेहद भावुक बैकस्टोरी दी गई है। इसके साथ ही ब्लैक विडो (फ्लोरेंस प्यू), ब्रूस बैनर उर्फ हल्क (मार्क रफालो), स्कॉर्पियन (माइकल मैंडो), फ्रैंक उर्फ पनिशर (जॉन बर्नथल) आदि को सीमित भूमिकाओं के बावजूद कहानी का अहम हिस्सा बनाकर नोस्टैल्जिया क्रिएट करना सोने पर सुहागा साबित होता है।
एक्टिंग की बात करें, तो पूरा दारोमदार टॉम हॉलैंड के कंधों पर है और उन्होंने अपनी पूरी जान लगा दी है। स्पाइडर-मैन के रूप में उनकी गजब की फुर्ती देखने लायक है, वहीं इमोशनल सीन्स में उन्होंने सधी हुई अदाकारी की है। जिम्मेदारी के बोझ तले अपने प्यार एमजे और दोस्त नेड को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखता है।
रहस्यमयी जीन ग्रे के रूप में सैडी सिंक भी असरदार हैं। जबकि, बाकी कलाकारों को ज्यादा मौका नहीं मिला है। इसके बावजूद जेंडया की उपस्थिति प्रभावशाली है, खासकर जीन के उनके भीतर प्रवेश करने के बाद वाले सीन में वे शानदार हैं। वहीं, फ्लोरेंस प्यू, मार्क रफालो, जॉन बर्नथल, जैकब बैटलन अपने-अपने किरदारों से कहानी को मजबूती देते हैं।
फिल्म की एक अच्छी बात यह है कि डायरेक्टर डेस्टिन डेनियल क्रेटन सिर्फ ग्रैंड विजुअल इफेक्ट्स पर निर्भर नहीं रहते। वह शहर की गलियों, छोटे-मोटे अपराधों आदि को भी कहानी का हिस्सा बनाते हैं, जिससे स्पाइडर-मैन का मानवीय पक्ष उभरकर सामने आता है। हालांकि, सेकंड हाफ में फिल्म की गति थोड़ी धीमी और लंबाई ज्यादा लगती है। स्क्रीनप्ले में कहीं-कहीं दोहराव भी लगता है।
एडिटिंग में थोड़ी और कसावट होती तो फिल्म ज्यादा प्रभावी होती, लेकिन एक्शन सीक्वेंस जोरदार हैं। ऊंची इमारतों के बीच झूलते स्पाइडर-मैन के लड़ाई वाले सीन्स बढ़िया लगते हैं। कैमरा वर्क, विजुअल इफेक्ट्स, बैकग्राउंड स्कोर जैसे तकनीकी पक्ष मजबूत हैं। कुल मिलाकर, स्पाइडर-मैन के फैंस के लिए यह फुल-टू मनोरंजन का पूरा पैकेज है।
